द ग्रेट सर्कस ऑफ न्यूजरूम 14
सोमवार, 1 नवम्बर 2010
सर्कस की पिछली कड़ियां पढ़ें- एक दो तीन चार पांच छहसात आठ नौ दस ग्यारह बारह तेरह
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सर्कस का जोकर रोज की तरह अजीब-अजीब हरकतें कर रहा है। शुक्र है आज चीफ रिंग मास्टर नहीं है। चीफ होता है तो जोकर की हरकतें बढ़ जाती हैं। चीफ को झेलना आसान है। जोकर को झेलना मुश्किल है। जोकर हमेशा से खुद को स्मार्ट कलाकार समझता आया है। उसकी स्मार्टनेस के कई किस्से मशहूर हैं। जहां भी रहा किस्सों का किरदार बन गया।
वैसे किस्सा सुनाना जोकर को भी बहुत पसंद है। हर वक्त कोई न कोई किस्सा उसकी जुबान पर रहता है। पात्र बदलते रहते हैं। कहानी बदलती रहती है। वह नहीं बदलता। कभी लोमड़ी के किस्से को नमक मिर्च लगाकर बयां करता है। कभी मुर्गियों और सियार के बीच 'विकसित' होने वाली कथा को रस ले लेकर बांचने लगता है।
जोकर को गलतफहमी है। उसे लगता है सब उसे बहुत पसंद करते हैं। मानते हैं। जानते हैं। जोकर को लगता है कि इधर से उधर करने की उसकी 'खासियत' से बड़े कलाकार उससे खुश रहते हैं। जोकर का पब्लिक रिलेशन गजब का है। खासकर सीनियर रिंग मास्टर से उसकी खूब छनती है। वह रोज उसे दिन भर की रिपोर्ट मुहैया कराता है। इससे सीनियर रिंग मास्टर खुश रहता है। उसे भी लगता है कि वो सर्कस के बारे में सब जानता है। सभी कलाकारों की असलियत पहचानता है।
जोकर कभी एक जगह नहीं बैठता। यहां-वहां घूमता रहता है। ताक-झांक करता रहता है। एक जगह बैठकर काम करने में उसका मन नहीं लगता है। एक जगह बैठने पर उसके पीआर पर भी फर्क पड़ता है। इसलिए वह पूरे न्यूजरूम में नाचता रहता है। मोर की तरह नहीं। भालू की तरह। जोकर सीनियर कलाकरों और सीनियर रिंग मास्टर को सलाम बजाता रहता है। उसे लगता है कि ऎसा करके उसका पीआर बढ़ रहा है। वह लोकप्रिय हो रहा है। उसके रुतबे में इजाफा हो रहा है।
लोकप्रिय होना जोकर का पुराना ख्वाब है। वह बताता है कि सर्कस के बाहर उसकी बहुत जान-पहचान है। बड़े-बड़े कलाकार उसे जानते हैं। दूसरे सर्कस के चीफ रिंग मास्टर तक उसे पहचानते हैं। उसका नाम जानते हैं। उसकी बड़ी-बड़ी बातें सुनकर नए-नए चूहे और इक्का-दु्क्का बिल्लियां उसकी बातों में आ जाती हैं। उस पर यकीन कर लेती हैं। इससे जोकर फूला नहीं समाता। उसे लगता है कि सर्कस में उसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। पीआर में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है।
जोकर हर वक्त चीफ रिंग मास्टर तक पहुंचने की कोशिश करता रहता है। चीफ का चमचा बनना उसका अधूरा सपना है। वैसे इस ओहदे के लिए वह बिल्कुल परफेक्ट है। चीफ को इधर की उधर करने वाले और रिंग की हर खबर देने वाले 'कलाकार' बहुत पसंद हैं। वह हर वक्त ऎसे होनहार कलाकारों की तलाश में रहता है। समय-समय पर सर्कस में 'टैलेंट हंट' भी करवाता रहता है। इसीलिए जोकर चीफ का चमचा बनना चाहता है। उसे हर तरह की खबरें देकर उसके करीब आना चाहता है। वह जानता है। चीफ का करीबी होना फायदेमंद है। इससे सर्कस में उसका रुतबा बढ़ जाएगा। सब उससे डरने लगेंगे। पता नहीं कब कौन सी खबर चीफ तक पहुंचा दे। तब कोई उससे सवाल नहीं करेगा। ये नहीं पूछेगा कि उसने आज क्या किया? किसी की यह पूछने की हिम्मत नहीं होगी कि उसका शो तैयार है या नहीं?
जोकर सर्कस का खबरिया है। उसके पास हर तरह की खबर होती है। यह उसका दावा भी है। वह दावे बहुत करता है। वो भी बड़े-बड़े। जबरन कहानी सुनाना और सर्कस के दूसरे कलाकारों को बोर करना उसका प्रिय शगल है। सब उसकी बात सुनते हैं। कुछ सुनने का दिखावा करते हैं। जोकर की अनदेखी कर पाना मुश्किल है। खतरनाक भी। क्योंकि उसकी जेब में नमक और मिर्च भारी तादाद में रहता है। जिसे लगा-लगाकर वो खबरों को मसालेदार बनाता रहता है। चाट की तरह चमकाता रहता है। उसकी 'चाट' से सब डरते हैं। 'बड़ा' हो या छोटा। पतला हो या 'मोटा'। लोमड़ी हो या बिल्ली। चूहा हो या शेर। या फिर सियार हो या गीदड़।
सर्कस में जोकरों की कमी नहीं है। कुछ शौक से जोकर बनते हैं। कुछ वक्त के साथ-साथ जोकर के सांचे में ढल जाते हैं। जाने-अनजाने। कुछ पैदायशी जोकर होते हैं। सर्कस में दूसरी प्रजाति के जोकरों की तादाद ज्यादा है। ये वो फनकार हैं जो वक्त के साथ-साथ जोकर के सांचे में ढल गए। जरूरत सब कुछ सिखा देती है। किसी को जोकरगिरी सिखा देती है। किसी को जमूरा बना देती है। यही हकीकत है। यही सर्कस है। (जारी...)
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सर्कस का जोकर रोज की तरह अजीब-अजीब हरकतें कर रहा है। शुक्र है आज चीफ रिंग मास्टर नहीं है। चीफ होता है तो जोकर की हरकतें बढ़ जाती हैं। चीफ को झेलना आसान है। जोकर को झेलना मुश्किल है। जोकर हमेशा से खुद को स्मार्ट कलाकार समझता आया है। उसकी स्मार्टनेस के कई किस्से मशहूर हैं। जहां भी रहा किस्सों का किरदार बन गया।
वैसे किस्सा सुनाना जोकर को भी बहुत पसंद है। हर वक्त कोई न कोई किस्सा उसकी जुबान पर रहता है। पात्र बदलते रहते हैं। कहानी बदलती रहती है। वह नहीं बदलता। कभी लोमड़ी के किस्से को नमक मिर्च लगाकर बयां करता है। कभी मुर्गियों और सियार के बीच 'विकसित' होने वाली कथा को रस ले लेकर बांचने लगता है।जोकर को गलतफहमी है। उसे लगता है सब उसे बहुत पसंद करते हैं। मानते हैं। जानते हैं। जोकर को लगता है कि इधर से उधर करने की उसकी 'खासियत' से बड़े कलाकार उससे खुश रहते हैं। जोकर का पब्लिक रिलेशन गजब का है। खासकर सीनियर रिंग मास्टर से उसकी खूब छनती है। वह रोज उसे दिन भर की रिपोर्ट मुहैया कराता है। इससे सीनियर रिंग मास्टर खुश रहता है। उसे भी लगता है कि वो सर्कस के बारे में सब जानता है। सभी कलाकारों की असलियत पहचानता है।
जोकर कभी एक जगह नहीं बैठता। यहां-वहां घूमता रहता है। ताक-झांक करता रहता है। एक जगह बैठकर काम करने में उसका मन नहीं लगता है। एक जगह बैठने पर उसके पीआर पर भी फर्क पड़ता है। इसलिए वह पूरे न्यूजरूम में नाचता रहता है। मोर की तरह नहीं। भालू की तरह। जोकर सीनियर कलाकरों और सीनियर रिंग मास्टर को सलाम बजाता रहता है। उसे लगता है कि ऎसा करके उसका पीआर बढ़ रहा है। वह लोकप्रिय हो रहा है। उसके रुतबे में इजाफा हो रहा है।
लोकप्रिय होना जोकर का पुराना ख्वाब है। वह बताता है कि सर्कस के बाहर उसकी बहुत जान-पहचान है। बड़े-बड़े कलाकार उसे जानते हैं। दूसरे सर्कस के चीफ रिंग मास्टर तक उसे पहचानते हैं। उसका नाम जानते हैं। उसकी बड़ी-बड़ी बातें सुनकर नए-नए चूहे और इक्का-दु्क्का बिल्लियां उसकी बातों में आ जाती हैं। उस पर यकीन कर लेती हैं। इससे जोकर फूला नहीं समाता। उसे लगता है कि सर्कस में उसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। पीआर में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है।
जोकर हर वक्त चीफ रिंग मास्टर तक पहुंचने की कोशिश करता रहता है। चीफ का चमचा बनना उसका अधूरा सपना है। वैसे इस ओहदे के लिए वह बिल्कुल परफेक्ट है। चीफ को इधर की उधर करने वाले और रिंग की हर खबर देने वाले 'कलाकार' बहुत पसंद हैं। वह हर वक्त ऎसे होनहार कलाकारों की तलाश में रहता है। समय-समय पर सर्कस में 'टैलेंट हंट' भी करवाता रहता है। इसीलिए जोकर चीफ का चमचा बनना चाहता है। उसे हर तरह की खबरें देकर उसके करीब आना चाहता है। वह जानता है। चीफ का करीबी होना फायदेमंद है। इससे सर्कस में उसका रुतबा बढ़ जाएगा। सब उससे डरने लगेंगे। पता नहीं कब कौन सी खबर चीफ तक पहुंचा दे। तब कोई उससे सवाल नहीं करेगा। ये नहीं पूछेगा कि उसने आज क्या किया? किसी की यह पूछने की हिम्मत नहीं होगी कि उसका शो तैयार है या नहीं?
जोकर सर्कस का खबरिया है। उसके पास हर तरह की खबर होती है। यह उसका दावा भी है। वह दावे बहुत करता है। वो भी बड़े-बड़े। जबरन कहानी सुनाना और सर्कस के दूसरे कलाकारों को बोर करना उसका प्रिय शगल है। सब उसकी बात सुनते हैं। कुछ सुनने का दिखावा करते हैं। जोकर की अनदेखी कर पाना मुश्किल है। खतरनाक भी। क्योंकि उसकी जेब में नमक और मिर्च भारी तादाद में रहता है। जिसे लगा-लगाकर वो खबरों को मसालेदार बनाता रहता है। चाट की तरह चमकाता रहता है। उसकी 'चाट' से सब डरते हैं। 'बड़ा' हो या छोटा। पतला हो या 'मोटा'। लोमड़ी हो या बिल्ली। चूहा हो या शेर। या फिर सियार हो या गीदड़।
सर्कस में जोकरों की कमी नहीं है। कुछ शौक से जोकर बनते हैं। कुछ वक्त के साथ-साथ जोकर के सांचे में ढल जाते हैं। जाने-अनजाने। कुछ पैदायशी जोकर होते हैं। सर्कस में दूसरी प्रजाति के जोकरों की तादाद ज्यादा है। ये वो फनकार हैं जो वक्त के साथ-साथ जोकर के सांचे में ढल गए। जरूरत सब कुछ सिखा देती है। किसी को जोकरगिरी सिखा देती है। किसी को जमूरा बना देती है। यही हकीकत है। यही सर्कस है। (जारी...)




1 comments:
आति सुंदर जोकर
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