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रविवार, 1 मार्च 2009

द ग्रेट स‌र्कस ऑफ न्यूजरूम-1

आज कमेंटरी का मूड है। मैं कमेटरी करूंगा एक स‌र्कस की। यह एक ऎसा स‌र्कस है जिसका शो रोज होता है। 24 घंटे चलता है यह स‌र्कस। यहां भी एक रिंग है। रिंग के अंदर कई कलाकार हैं। चीफ रिंग मास्टर भी है। चीफ रिंग मास्टर अच्छा आदमी है। लेकिन कभी-कभी उस‌े भी गुस्सा आ जाता है। उस‌े स‌र्कस का पुराना अनुभव है। उसे स‌र्कस का हर खेल अच्छी तरह आता है। वह बहुत स‌मय स‌े खेल रहा है। लेकिन अब वह वरिष्ठ हो चुका है। अब वह खेलता नहीं, खिलाता है। रिंग मे हंटर फटकारता है। अच्छे-अच्छों को काबू में रखता है। टेढ़ों को स‌ीधा रखता है।

स‌र्कस के इस रिंग में अपने फन का कमाल दिखाने वाले कलाकार तो एक स‌े बढ़कर एक हैं। हर कोई कई-कई फन में माहिर है। हर किसी के भीतर स‌े उसकी योग्यता बाहर निकलने को बेताब रहती है। बस चले तो हर कलाकार की योग्यता बाहर निकलकर पूरे रिंग में कुलांचे भरने लगे। लेकिन ऎस‌ा मौका कम ही आता है। जूनियर रिंग मास्टर स‌बको काबू में रखता है।
कोई स‌र्कस के इस खेल में अकेला नहीं है। स‌ीनियर रिंग मास्टर भी कई हैं। सीनियर रिंग मास्टर के पीछे भी कई लोग हैं जो खुद को स‌ीनियर रिंग मास्टर स‌े कम नहीं स‌मझते। कुछ तो ऎसे हैं जो स‌िर्फ मौके की फिराक में हैं। मौका मिलते ही धकियाकर चीफ रिंग मास्टर की कुर्सी तक कब्जा लेंगे। देखते हैं उन्हें कब मौका मिलता है।
स‌र्कस का यह खेल ऎसा है कि हर कोई अपनी कुर्सी बचाने की फिराक में लगा रहता है। जूनियर और स‌ीनियर रिंग मास्टर के ऊपर भी कई मास्टर हैं। अभी-कभी चीफ मास्टर को भी गुस्सा आ जाता है। वह स‌ीनियर औऱ जूनियर रिंग मास्टर पर अपना हंटर फटकारने लगते हैं। तब उन रिंग मास्टर को भी गुस्सा आता है और वह अपना गुस्सा बेचारे कलाकारों पर उतारता है।
इस स‌र्कस में चूहा, लोमड़ी, गीदड़, शेर, भालू, बंदर, बिल्ली, चीता स‌भी शरीक हैं। स‌ियार तो स‌बस‌े ज्यादा हैं। उनमें स‌े ज्यादातर रंगे हुए स‌ियार हैं।
स‌बकी अपनी-अपनी अहमियत है। स‌बकी अपनी-अपनी खासियत है। लेकिन एक बात स‌बमें स‌मान है। हेड रिंग मास्टर स‌े स‌ब खौफ खाते हैं। जैस‌े ही स‌र्कस में उसका रोल शुरू होता है। चूहा-बिल्ली जैसे छोटे-मोटे कलाकार तो कोने में दुबक जाते हैं औऱ कई कलाकार ऎसे हैं, जो ऊल-जलूल हरकतें करके यह जताने लगते है कि उन्होंने एक नया फन स‌ीखा है। नई कला ईजाद की है। लिहाजा वह बड़े अहम हैं। वह बड़े बिजी हैं। सर्कस के लिए वह बहुत अहम हैं। ऎसे कलाकार कई बार चीफ रिंग मास्टर को धोखा देने में कामयाब भी हो जाते हैं। आखिर कलाकार जो हैं। कला का जादू तो चलाएंगे ही। उनकी कला के लिए ही तो स‌र्कस का मालिक उन्हें पैसे देता है। मोटी तरख्वाह देता है। (जारी...)

3 comments:

Udan Tashtari ने कहा…

सही कमेन्ट्री है--जारी रहिये. :)

विष्णु बैरागी ने कहा…

अभी तो भूमिका भी नहीं बनी है। जरा जल्‍दी कीजिए। मामला न्‍यूज चेनल का लग रहा है। उत्‍सुकता तनिक ज्‍यादा ही है।

पशुपति शर्मा ने कहा…

क्या बात है रवींद्रजी... सर्कस में कुछ फन आप भी सीख लीजिए... क्योंकि शो में हर कलाकार को मौका मिलता है... तय कर लीजिए कि आपकी बारी आई तो कौन सा आइटम पेश करेंगे।

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