Related Posts with Thumbnails

तुम्हारा नाम क्या है? ...(4)

शुक्रवार, १५ फरवरी २००८

मुझे तुम्हारे किसी सवाल का जवाब नहीं देना।
चलो प्रिया। जल्दी करो। आज तो इस पागल ने सबके सामने हमारा तमाशा बना दिया। पता नहीं किस जनम की दुश्मनी निकाल रहा है। हाथ धोकर पीछे पड़ गया है।
नेहा इतने तेज कदमों से चलने की कोशिश कर रही थी कि उसके कदम भी उसका साथ नहीं दे पा रहे थे। प्रिया उसे रुकने की आवाज देकर उसके पीछे-पीछे भाग रही थी।
आसपास के लोगों की नजरें नेहा और प्रिया पर ही थीं। लोगों को भी मुफ्त में अच्छा-खासा तमाशा जो देखने को मिल गया था।
प्रिया ने एक बार पीछे मुड़कर देखा। वह लड़का अब भी वहीं पर खड़े होकर उन्हें घूरे जा रहा था।
अब शायद प्रिया को उससे कुछ सहानुभूति होने लगी थी।
मन ही मन प्रिया ने पिछली सारी बातें दोबारा याद करने की कोशिश कीं।...नाम ही तो पूछ रहा था बेचारा। कोई उल्टी-सीधी बात तो नहीं की। कहीं होटल या क्लब में ले जाने की बात तो कर नहीं रहा था। मम्मी-पापा से ही तो मिलवाना चाहता है। तो क्या शादी...? यानी उसकी इरादा नेक है। लेकिन वो नहीं जानता कि...
अचानक प्रिया ने अपनी सोच पर विराम लाग दिया। इसके बावजूद वह लगातार सब कुछ समझने की पूरी कोशिश कर रही थी।
वहीं नेहा के कदम अब भी रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
प्रिया ने उसे आवाज दी, नेहा ने पीछे मुड़कर देखा और उसके कदम रुक गये।
प्रिया भाग कर गई और उससे लिपट गई। अब चलो भी। नेहा ने फिर दोहराया। उसका मूड अब भी ठीक नहीं हुआ था।
क्या बेशर्मी है। रोज का तमाशा हो गया है। पीछा ही नहीं छोड़ रहा है। लगता है मुझे यह नौकरी ही छोड़नी पड़ेगी। नेहा ने निराशा भरे स्वर में कहा।
नौकरी क्यों छोड़ेगी। तेरे लिये दूसरी नौकरी रक्खी है क्या? फिर घूमना इस कंपनी से उस कंपनी, दूसरी नौकरी की तलाश में। घर में तो बैठेगी नहीं? इतना तो मैं भी जानती हूं।
तेज कदमों की आवाज के सिवा अब नेहा और प्रिया के बीच कुछ नहीं था।
दोनों खामोश थीं।
हास्टल नजदीक ही था कि नेहा ने खामोशी तोड़ी। छुट्टी ले लेती हूं एक हफ्ते की।
उससे क्या होगा?
अरे, दो-तीन दिन बाद वो भी अपना रास्ता बदल देगा।
हां, ऐसा हो सकता है। लेट्स ट्राई! प्रिया को नेहा का यह आइडिया जंच गया।
लेकिन मैं अकेले तो आफिस में बोर हो जाउंगी और रास्ते में भी।
वो मेरे पीछे पड़ जाएगा। तुम्हारे बारे में पूछने लगेगा। तब मैं अकेली क्या करूंगी?
हमममम...ऐसा कर तू भी छुट्टी कर ले। नेहा यूं बोली जैसे उसके दिमाग में कोई शानदार आइडिया आ गया हो। (जारी...)

3 comments:

Mired Mirage ने कहा…

कहानी बहुत रोचक है । यही सब जब जीवन में कुछ हेर- फेर के साथ बार- बार लड़कियों के जीवन में घटता है तो उन्हें कितनी मानसिक व भावनात्मक कठिनाइयों व पीड़ा से गुजरना पड़ता है यह कम ही पुरुष समझ सकते हैं ।
घुघूती बासूती

रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

मानवीय संवेदनाओं के धरातल पर आपकी भावनात्मक प्रस्तुति वेहद अच्छी लगी !

विनय प्रजापति 'नज़र' ने कहा…

बढ़िया कहानी लिखते हो, मोड़-मोड़ हर मोड़... मज़ा आ जाता है... कभी अपने किस्से भी सत्य घटना पर आधारित कह के डालो, मज़ा 100 गुना हो जायेगा... नहीं शेयर करना चाहते तो बात अलग है!

  © Blogger templates Newspaper by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP